नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी:- ‘एन ऑर्डिनरी लाइफ’

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नवाजुद्दीन सिद्दीकी ‘एन ऑर्डिनरी लाइफ’

हाल ही में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की जिंदगी के ऊपर एक किताब चर्चाओं में है नाम है नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी:- ‘एन ऑर्डिनरी लाइफ’। चालिए जानतें है उनकी जिंदगी से जुड़े कई अहम् पहलुओं को।

एक शख्स की है जिसने 12  साल लंबी जद्दोजहद के बाद कामयाबी हासिल की लेकिन जब हम उनके बीते हुए कल को देखते है तो लगता है उन्होंने अपने देखे हुए सपने को पूरा करने के लिए वो तमाम कोशिश की जो उन्हें अपने सपने के और करीब ले जाती है।

हम बात कर रहे है नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी  (Nawazuddin Siddiqui) की जो अपने असल जीवन में कभी कैमिस्ट बने तो कभी वॉच मैन । 9 भाई बहन के बीच पले बड़े नवाज़ यूपी के एक गांव बूधाना से है। स्कूल में साइंस की पढ़ाई करने के बाद उन्हें बड़ोदा की एक कंपनी में चीफ कैमिस्ट की नोकरी मिल गई। लगभग 1 साल वहा नोकरी करने के बाद नवाज़ (Nawazuddin Siddiqui) को वहा कुछ कमी महसूस हुई उन्हें लगा ये काम उनके लिए नही है।

बहुत से लोग सोचते हैं कि नवाज़ुद्दीन एक गरीब परिवार से हैं, लेकिन ऐसा नही है, वो एक well-off ज़मींदार किसानो की family से belong करते हैं। हालांकि, अपना करियर बनाते वक्त उन्होंने परिवार से कोई आर्थिक मदद नहीं ली और बहुत बुरे दिने देखे, जो ultimately उन्हें और strong बनाते गए।

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गैंग्स ऑफ वासेपुर में नवाजुद्दीन सिद्दीकी

नवाज़ ने (Nawazuddin Siddiqui) गाँव में कैमिस्ट की नौकरी छोड़ कर दिल्ली आ गए पर उन्हें पता नही था की दिल्ली में करना क्या है एक दिन उनके किसी दोस्त ने उन्हें थिएटर दिखाया उस रंग मंच को देख कर नवाज़ (Nawazuddin Siddiqui) को लगा की वो जो करना चाहते है उन्हें मिल गया और वो एक थिएटर ग्रुप के साथ जुड़ गए। लेकिन थिएटर में उन्हें पैसे नही मिलते थे और उन्होंने नोएडा में वॉचमैन की नोकरी मिल गई वो दिन भर वॉचमैन की नोकरी करते और शाम को एक्टिंग की प्रैक्टिस यानी थिएटर करते। लगभग एक साल बीत गया नवाज़ (Nawazuddin Siddiqui) दिन में बड़े लोगो को सलाम ठोकते और शाम को थिएटर करते।

एक्टिंग सीखने के लिए National School Of Drama (NSD), दुनिया की सबसे अच्छी जगहों में से एक है। नवाज़ुद्दीन ने उसमे एडमिशन लेने का सोचा पर उसके लिए पहले से कुछ plays का experience चाहिए था, इसलिए उन्होंने एक प्ले ग्रुप ज्वाइन कर लिया, जिसका नाम था Shakshi Theatre Group; यही वो ग्रुप था जिसमे उनके साथ मनोज बाजपेयी और सौरभ शुक्ला भी एक्टिंग के गुर सीख रहे थे।

छोटा कद, सावला चेहरा एक हीरो की तस्वीर से कोसो दूर और फिर मुम्बई में भी निराशा ही हाथ लगी। कई साल बीत गए और अब तक नवाज़ (Nawazuddin Siddiqui) को फिल्मो में एक एक सीन मिलने लगा और फिर पैसो के लिए कई फिल्मो में वो भीड़ का हिस्सा बनने लगे। इसके बाद नवाज़ (Nawazuddin Siddiqui) को लगा जैसे किस्मत ने करवट ले ली हो। उन्हें 1999 में आमिर खान की सरफ़रोश में एक छोटा सा रोल मिला लेकिन वो सरफ़रोश में कब आये और कब गए पता ही नही चला। उसके बाद मनोज वाजपई की ‘शूल’ , राम गोपाल वर्मा की ‘जंगल’  और संजय दत्त के साथ ‘ मुन्ना भाई एम बी बी एस’  जैसी बड़ी बड़ी फिल्मो में छोटे छोटे किरदार किये।

कहते हैं जो लोग अपना सफर काफी नीचे से शुरू करते हैं, वे काफी ऊपर तक जाते हैं। तभी तो 1999 में शूल फिल्म में वेटर और सरफरोश में मुखबिर का रोल करने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी ऐसे सितारे बन चुके हैं जिनकी कान फिल्म फेस्टिवल में एक साथ तीन-तीन फिल्में अपना जलवा बिखेरने जाती हैं तो उन्हें एक नहीं चार फिल्मों के लिए एक साथ राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।

जिंदगी का फलसफा
मैंने जीवन में रिजेक्शन और परेशानियों का एक लंबा दौर देखा है, लेकिन मैंने कभी धीरज नहीं खोया सिर्फ और सिर्फ अपना काम करने में लगा रहा। मैंने सिर्फ ओरिजिनेलिटी पर ध्यान दिया. फिर चाहे वह मेरी फिल्में हों या फिर असल जिंदगी, मैं सिर्फ एक अच्छे कलाकार के तौर पर पहचान चाहता हूं। मेरे जीवन का सिर्फ यही फलसफा रहा है, ‘‘यह इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजिए, आग का दरिया है और डूब कर जाना है’’। बस इस मशîर शेर में इश्क की जगह मैं जिंदगी शब्द जोड़ देता हूं।

जिंदगी के खुलासे करते है बेबाकी से 

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जिंदगी के खुलासे करते है बेबाकी से

हाल ही में नवाजुद्दीन सिद्दीकी अपनी ऑटोबायोग्राफी को लेकर चर्चा में भी आ गए हैं। 25 अक्टूबर को उनकी किताब ‘एन ऑर्डिनरी लाइफ’ रिलीज होगी। इस किताब में उन्होंने अपनी लव लाइफ को लेकर कई खुलासे किए हैं। जिसमें फिल्म ‘मिस मालिनी’ की एक्ट्रेस निहारिका का जिक्र किया गया है।

 

14 COMMENTS

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