क्या है यह रेडिएटिव स्काई कूलिंग, कैसे रखेगी घर को ठंडा

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NO AC WILL REQUIRED
प्रतीकात्मक फोटो

एसी जोकि आज घर की जरुरत बन गया है, और खासतौर से गर्मियों में एसी के बिना रहना बहुत मु्श्किल हो जाता है। और बिजली के बिल का डर लोगों को बहुत सताता है आपने यह तो सोचा होगा कि काश ऐसा हो हम एसी चलायें और बिल भी कम आयें, और एसी चलाना ना पडें लेकिन फिर भी घर ठंडा रहे, हो सकता है यह आपके लिए कल्पना मात्र हो लेकिन अब ऐसा संभव हो सकेगा क्योंकि शोधकर्ताओं ने ऐसी तकनीकी विकसित कर ली है। जिसमें की बिना बिजली और एसी के घर ठंडा रहेगा और आप बिजली का बिल भी देने से बच जायेगें, और यह तकनीकी है रेडिएटिवस्काई कूलिंग। क्या है यह तकनीकी और कैसे काम करेगी जानते हैं यहां-

कैसे काम करेगी यह तकनीकी, क्या है इसकी खास बातें

शोधकर्ताओं के अनुसार रेडिएटिव स्काई कूलिंग की तकनीक से ऐसा संभव है, शोध रिपोर्ट के प्रमुख सह-लेखक रमन ने बताया, “रेडिएटिव स्काई कूलिंग हमारे वातावरण की प्राकृतिक चीजों का लाभ उठाती है, यदि आप गर्मी को अवरक्त विकिरण के रूप में किसी ठंडी चीज में डाल सकते हैं, जैसे कि बाहरी अंतरिक्ष तो आप बिजली के बिना किसी भी एक इमारत को ठंडा कर सकते हैं। इसके बाद यह पूरे परिवेश में वायु तापमान को शांत करता है और गैर-वाष्पीकरणीय रास्ता प्रदान करता है.” इसी के जरिये आप बिना बिजली के घर को ठंडा रख सकते हैं। इस तकनीकी को सिलिकॉन डाइऑक्साइड की सात परतों और सिल्वर की पतली परत के शीर्ष पर हैफनियम ऑक्साइड से बनाया गया है।

इसको बनाने में शोधकर्ता रमन और सह-कार्यकर्ता एली गोल्डस्टीन और शानुई फैन को जाता है, खास बात यह है कि वर्ष 2014 में इसका पहला प्रयोग किया गया था।

लेखकों के मुताबिक, सामग्री ‘रेडिएटर और एक उत्कृष्ट दर्पण’ के रूप में कार्य करती है और भवन को कम एयर कंडीशनिंग की स्थिति में अधिक ठंडा करती है, सामग्री की बनावट एक आवृत्ति पर अवरक्त किरणों को विकीर्ण करने के लिए तैयार की जाती है, जिससे उन्हें इमारत के पास हवा को गर्म किए बिना बाहर पहुंचा देती है.” रमन ने कहा, “भारतीय इमारतों, सुपरमार्केट, आफिस, डेटा केंद्र, कार्यालय भवन, मॉल और अन्य व्यावसायिक भवनों में हमारा तरल पदार्थ कूलिंग पैनल वाणिज्यिक रेफ्रिजरेशन में बड़ा प्रभावी हो सकता है। साथ ही, पूरी तरह से बिजली मुक्त और सभी ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस तकनीक का उपयोग किया जा सकता है जहां लोगों को जरुरत है।

उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक उपयोग करने के लिए कम से कम दो तकनीकी समस्याएं हल होनी चाहिए. पहली, इंजीनियरों को सबसे पहले यह पता होना चाहिए कि कोटिंग सामग्री में इमारत की गर्मी को कुशलतापूर्वक कैसे ले जाएं. इसके लिए वे एक पैनल बना सकते हैं.”

इस नयी तकनीकी के जरियें बिजली की भी बचत होगी और गांव में भी उन लोगों को लाभ मिलेगा जो अभी भी बिजली को लेकर परेशान हैं और गर्मी में एसी की सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

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