अब इस मुद्दें पर क्यों बवाल मचा रहें है विश्व के सारे देश

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meeting of nations
राष्ट्रों की बैठक

एक बार फिर से बहस शुरू हो गई है। कोई देश एक ओर है तो कोई दूसरी ओर मतलब कहें कि बवाल मचा ही हुआ है। यह बवाल किसी साधारण मुद्दे को लेकर नही परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दें पर हो रहा है। पर इसमें भी परमाणु शक्तियों ने अपनें हाथों को पीछें खीच लिया है जो की उनका पैतरा ही है। परमाणु शक्ति वाले देश ही हमेशा अपनी ही सुरक्षा के नाम पर दूसरें देशों की सुरक्षा को हमेशा से ही खतरें में डालते आये है।

हाल ही में लगभग पचास देशों ने परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने के लिये एक संधि पर हस्ताक्षर किये हैं। हालाँकि इस संधि को दुनिया की परमाणु शक्तियों ने ठुकरा दिया है, लेकिन समर्थकों ने एक ऐतिहासिक समझौते के रूप में इसका स्वागत किया है।

nuclear weapons
परमाणु हथियार

कहाँ से हुई शुरुवात

जुलाई 2017 में संयुक्त राष्ट्र ने परमाणु हथियारों पर रोक से संबंधित इस संधि को अपनाया है, जो परमाणु हथियारों के उपयोग, उत्पादन, हस्तांतरण, अधिग्रहण व तैनाती को अवैध करार देती है। यह संधि कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा तैयार की गई 10 साल की तैयारी का परिणाम है।

समझौते की अहम् बातें

इस संधि के तहत परमाणु हथियार या अन्य परमाणु विस्फोटक उपकरणों के विकास, परीक्षण, उत्पादन, निर्माण और  उनकों रखनें के साथ-साथ परमाणु हथियारों से संबंधित गतिविधियों के पूरे रख रखाव पर रोक लगाई गई है। संयुक्त राष्ट्र के 192 सदस्यों में से दो-तिहाई का प्रतिनिधित्व कर रहे 122 वार्ताकार देशों ने इसी साल 7 जुलाई को इसके पक्ष में और एकमात्र देश नीदरलैंड ने इसके विपक्ष में मतदान किया, जबकि सिंगापुर जैसा देश मतदान प्रक्रिया से बाहर रहा। उल्लेखनीय है कि दुनिया के परमाणु शक्ति संपन्न तकरीबन सभी 40 देश अपनी सुरक्षा के संदर्भ में परमाणु शस्त्र समर्थक हैं, जो कि इस नई ‘परमाणु निषेध संधि’ के पक्ष में नहीं हैं।

भारत का क्या सोचना है

बता दें कि भारत ने पिछले साल ही अपने भारत ने कहा था कि वह इस बात से सहमत नहीं है कि भारत इसे अपनाएगा। दरअसल, भारत की ओर से जिनेवा  सम्मलेन की चर्चा के लिये एकमात्र बहुपक्षीय मंच बताया गया है। भारत अब भी परमाणु अप्रसार को लेकर वार्ताएँ शुरू करने का समर्थन करता है, लेकिन उसके लिये जिनेवा के कानून को ही स्वीकार करता है। जो कहता है कि सभी परमाणु संधि का नियम के अनुसार पालन करेगें।

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