आख़िर ऐसा क्या हुआ कि हज़ारों विद्यार्थियों ने किया दिल्ली में रोड जाम

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against paramount coaching
पैरामाउंट संस्थान के विरूद्ध

दिल्ली की सुबह यहाँ मुखर्जीनगर में क्लासेज के साथ शुरू होती है। जहाँ विद्यार्थी देश के कोने कोने से आते है अपनें सपनोँ को पूरा करने के लिए। रोज़ सुबह इसी उम्मीद से कोचिंग इंस्टिट्यूट में जाते है कि उनका भविष्य एक दिन ज़रूर उज्जवल होगा।

बता दे कि नार्थ दिल्ली का मुखर्जीनगर प्राइवेट कोचिंग संस्थानों के लिए देश भर में प्रसिद्द है यहाँ सिविल परीक्षा से लेकर कर्मचारी चयन आयोग व जुडिशियल सर्विस तथा अन्य सरकारी नौकरियों के लिए क्लासेज दी जाती है। हर साल लगभग 5 लाख युवा मुखर्जीनगर आते है जिनमें से सबसे ज्यादा तादात नार्थ इंडिया के विद्यार्थीयों की होती है। साथ ही नार्थ ईस्ट भारत के विद्यार्थीयों को भी देखा जा सकता है।

student crowd
कोचिंग इंस्टिट्यूट के विद्यार्थी

अगर बात कर्मचारी चयन आयोग, पुलिस भर्ती, बैंकिंग सेवाएँ की जाए तो आप यहाँ पूरे हरयाणा को देख सकतें है।

यह पर दो बेहतरीन कोचिंग संस्था है जो लोअर सेवाओं की तैयारी करातें है:-

  1. पैरामाउंट संस्थान
  2. के डी कैंपस

इन दोनों संस्थानों में हर क्लास में लगभग 500 विद्यार्थी एक साथ पढ़ते है। एक दिन में लगभग इनकें एक हॉल  में 6 से 8 क्लासेज होती है। आपको जानकार हैरानी होगी कि मुखर्जीनगर में ऐसे लगभग 2000 हॉल होंगे।

मानिए यहाँ शिक्षा नही शिक्षा का व्यापार हो रहा हों।

मामला क्या हैं?

पैरामाउंट संस्थान ने हज़ारो विद्यार्थीयों से फ़ीस लेकर उनका दाख़िला अपने संस्थान में करवा लिया जब आज सुबह वे क्लास लेने आये तो उन्हें क्लास में बैठने तक की जगह नही मिली और देखतें ही देखतें हज़ारों विद्यार्थीयों ने सड़क को जाम कर दिया। वे सड़कों पर उतर आये और पैरामाउंट संस्थान के खिलाफ़ नारेबाज़ी करने लगे। इसी दौरान संस्थान के एक प्रख्यात् शिक्षक राकेश यादव  ने विद्यार्थीयों से कहा कि जिनको क्लास में जगह नही मिल पाई है वे वापस घर चले जाए, उनका पैसा उन्हें वापस कर दिया जाएगा। ये कारण काफी था विद्यार्थीयों के गुस्से को और भड़काने के लिए।

पुलिस की कार्यवाहीं

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स्तिथि को सम्हालने की कोशिश करती पुलिस

पुलिस ने तुरंत सक्रिय होकर स्थिति को सम्हालने की कोशिश की पर अभी भी विद्यार्थी अपनी ज़िदो पर अड़ कर बैठें हुए है। मुखर्जीनगर के थाने के S.I का कहना है कि SHO को सुचना दे दी गई है, जल्द ही इस समस्या को सुलझा कर यातायात को सुचारू कर दिया जायेगा।

अभी भी विद्यार्थीयों के सामनें प्रश्न खड़ा है कि अब वे पैसे देने के बाद कहा जाए? और कुछ अभी भी यही सोच रहे है कि ऐसे कैसे उनका भविष्य बन पायेगा?

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