प्राचीन मंगल पर कभी था तरल पानी

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Mars planet
मंगल ग्रह

मंगल सौरमंडल में सूर्य से चौथा ग्रह है। पृथ्वी से इसकी आभा रक्तिम दिखती है, जिस वजह से इसे “लाल ग्रह” के नाम से भी जाना जाता है। सौरमंडल के ग्रह दो तरह के होते हैं – “स्थलीय ग्रह” जिनमें ज़मीन होती है और “गैसीय ग्रह” जिनमें अधिकतर गैस ही गैस है। पृथ्वी की तरह, मंगल भी एक स्थलीय धरातल वाला ग्रह है, इसका वातावरण विरल है। और मंगल मंगल ग्रह हमेशा से वैज्ञानिकों के लिए चर्चा का विषय रहा है, दुनिया की सबसे बड़ी अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के द्वारा हाल ही में मंगल ग्रह पर खारे पानी की उपलब्‍धता का प्रमाण देने के बाद यह संभावना प्रबल हो गई है कि मंगल पर जीवन है, और इस पर कई तरह के शोध किये जा रहे हैं।

मंगल के बारें में और जानने के लिए हाई रिजोल्यूशन वाली तस्वीरों और स्थलाकृति संबंधी आंकड़ों की मदद से अमेरिका में जैक्सन स्कूल ऑफ जियोसाइंसेज के बी टी कार्डेनास और उनके सहकर्मियों ने नदी संबंधी जमावों के प्रारूप और बदलावों का पता लगाया, मंगल ग्रह पर फैले नदियों के अवशेषों के अध्ययन के अनुसार, लगभग साढ़े तीन अरब साल पहले लाल ग्रह की सतह का पर्यावरण तरल जल के अनुकूल था।

शोधकर्ताओं ने कहा कि मंगल के एयोलिस डोरसा नामक क्षेत्र में कुछ बेहद सघन तरीके से जमा नदी अवशेष हैं। उन्होंने कहा कि इन जमावों को उपग्रही तस्वीरों से देखा जा सकता है क्योंकि यहां ‘टोपोग्राफिक इनवर्जन’ नामक एक प्रक्रिया हुई है, जिसके तहत नदी में जमाव हो जाने से सतह पर टीलानुमा आकृतियां बनी हुई हैं। देखा जाए तो मंगल ग्रह के संबध वैज्ञानिक कई तरह के शोध करते रहते हैं वैज्ञानिकों के लिए ही नहीं बल्कि आम लोगों के लिए भी जिज्ञासा का विषय है, कि मंगल पर जीवन संभव हो सकता है, और वहां लोग जाकर रह सकते हैं फिलहाल अभी तो इसमें बहुत समय है और वैज्ञानिक आये दिन मंगल ग्रह को लेकर कई नये प्रयोग कर रहे हैं।

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