भारत में दूरसंचार प्रणाली का इतिहास और जियो का प्रभाव

0
423
TELECOM
भारत में दूरसंचार प्रणाली का उद्गगम

दूरसंचार शब्द का प्रयोग किसी विद्युत संकेत का किसी दूरार्ध क्षेत्र तक संचारित या प्रेषित करने के अर्थ में होता है,भारतीय दूरसंचार संसार का अत्यधिक तीव्रता से बढ़ता दूरसंचार उद्योग है।एक बड़ी आबादी, कम दूरसंचार निवेश स्तर और मजबूत आर्थिक विकास के कारण उपभोक्ताओं की आय में वृद्धि और खर्च में इजाफे ने भारत को विश्व में सबसे तेजी से बढ़ता हुआ दूरसंचार बाजार बनने में मदद की है। दूरसंचार का वास्तविक अर्थ अंतरिक्ष में दूर की दो जगहों के बीच सूचना का स्थानांतरण है।

दूरसंचार के लोकप्रिय अर्थ में हमेशा विधुत के संकेत शामिल रहे हैं और आजकल लोगों ने डाक या दूरसंचार के किसी भी अन्य कच्चे तरीके को इसके अर्थ से बाहर रखा है, इसलिए, भारतीय दूरसंचार के इतिहास को दूरसंचार की शुरूआत के साथ प्रारंभ किया जा सकता है, राज्य के स्वामित्व वाला पदस्थ पहला संचालक बीएसएनएल है। भारत में डाक और दूरसंचार क्षेत्रों में एक धीमी और असहज शुरुआत हुई थी। 1850 में, पहली प्रायोगिक विधुत तार रेखा हीरा हार्बर कोलकाता के बीच शुरू की गई थी, 1851 में, इसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कार्यालय के लिए खोला गया था।

28 जनवरी 1882, भारत के दूरसंचार इतिहास में लाल पत्र दिन है। इस दिन, भारत के गवर्नर जनरल काउंसिल के सदस्य मेजर ई. बैरिंग ने कोलकाता, चेन्नई और मुंबई में दूरभाष संचार केन्द्र खोलने की घोषणा की। कोलकाता के एक्सचेंज का नाम “केन्द्रीय एक्सचेंज” था जो 7, काउंसिल हाउस स्ट्रीट इमारत की तीसरी मंजिल पर खोला गया था। केन्द्रीय दूरभाष संचार केन्द्र के 93 ग्राहक थे। बॉम्बे में भी 1882 में दूरभाष संचार केन्द्र का उद्घाटन किया गया, और भारत में दूरभाष संचार सेवा आरम्भ हुयी।

ब्रिटिश काल में जबकि देश के सभी प्रमुख शहरों और कस्बों को दूरसंचार न से जोड़ दिया गया था, फिर भी 1948 में टेलीफोन की कुल संख्या महज 80,000 के आसपास ही थी। स्वतंत्रता के बाद भी विकास बेहद धीमी गति से हो रहा था। टेलीफोन उपयोगिता का साधन होने के बजाय हैसियत का प्रतीक बन गया था। टेलीफोनों की संख्या इत्मीनान से बढती हुई 1971 में 980,000, 1981 में 2.15 मिलियन और 1991 में 5.07 मिलियन तक पहुंची, जिस वर्ष देश में आर्थिक सुधारों को आरम्भ किया गया।

तब से लेकर अब तक भारत में दूरसंचार की प्रक्रिया बहुत ही तीव्र गति से आगे बढ रही है। और अन्य दूरसंचार उद्योग भारतीय बाजार में अपनी पहुंच बनाने में अवसर तलाश रहे हैं, इसी क्रम में अबतक कई दूरसंचार उद्योग ने अपनी पहुंच बनाई है। जिनमें सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा जियो दी रही है, क्योंकि जियो अपने उच्चतम जाल की वजह से अत्यन्त लोकप्रिय है इसका अंदाजा इसी सूचना से लगाया जा सकता है कि भारत में ही परन्तु समस्त संसार में जियो ने अपनी पहुंच बनाई रखी है। और रिलायंस समूह ने यह स्वप्न भी सत्य कर दिया है, प्रत्येक घर में दूरसंचार हो का साधन उपल्बध हो। प्रत्येक वर्ष दर वर्ष रिलायंस समूह अपने उपभोक्ताओं के लिये नवीनतम पेश कर रहा है। और इसी क्रम में रिलायंस जियो के एक वर्ष के अन्दर 13 करोड़ से अधिकतम उपभोक्ता हैं।

रिलायंस समूह के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने अपने संदेश में कहा कि जियो की सेवाओं को 5 सितंबर को एक साल पूरे हो गये हैं और पिछले एक साल में हमने कई रिकार्ड तोडें हैं, केवल भारत में ही नहीं दुनियाभर में भी। लेकिन मुझे सबसे बड़ी निजी संतुष्टि है, यह है कि मेरा यह मिथक टूट गया है कि भारत उच्चतम तकनीक को अपनाने के लिये तैयार नहीं है।

इसके साथ ही अंबानी ने यह भी कहा कि चुनौती न केवल एक नई तकनीक को चालू करने की है, बल्कि वास्तविक समय में इसे देशभर में जारी करने की भी थी.”

आपको बता दे कि जियो ने अपनी जारी करने के काल में 90 दिनों तक अपनी उन्नति संबंधी योजना के तहत मुफ्त में अन्तरराष्ट्रीय कम्प्यूटर तन्त्र और वार्तालाप करने की भी सुविधा दी। और अपनी यह योजना आगे भी बढा.दी थी। फिलहाल देखा जाये तो जियो ने अपनी पंहुच भारत के कोने -कोने में बना रखी है और हर स्तर के लोग इसका लाभ उठा रहे हैं , वाकई में रिलायंस जियो का यह बहुत सराहनीय प्रयास है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here