उत्तर प्रदेश के भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक ने किया आंतो के बैक्टारिया पर शोध

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प्रतीकात्मक फोटो

हमारे देश में कितनी ही विलक्षण प्रतिभायें है, फिर चाहे वह कोई भी क्षेत्र हो अगर हम विज्ञान की बात करें तो विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में भारतीयों ने बहुत उन्नति की है केवल अपने ही देश मे नहीं बल्कि विदेशों में भी भारत का नाम रोशन किया है। और अपनी प्रतिभा के जरिये लोगों को बीमरियों से निदान दिलाने के लिये भरसक प्रयास किये हैं। हमारा शरीर में कई तरह के तंत्रिका तंत्र और कोशिकायें होती है, जो हमारे शरीर के लिये बहुत ही आवश्यक हैं लेकिन जब यही तंत्रिका तंत्र ठीक तरह से काम ना करें तो बीमारी का रुप ले लेती है। ऐसी है एक बीमारी मल्टीपल स्क्लेरोसिस इस बीमारी से निपटने और इसके इलाज के लिये भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष मंगलम की अगुवाई में शोधकर्ताओं की एक टीम ने आंत के बैक्टीरिया ‘ प्रीवोटेला ‘ की खोज की है।

क्या है यह बीमारी

मल्टीपल स्क्लेरोसिस ‘ केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की बीमारी है जो दिमाग और रीढ़ को प्रभावित करती है।. यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) के कमजोर होने और माइलिन कोशिकाओं का बनना बंद होने के कारण होती है। इस बीमारी का प्रमुख कारण आनुवांशिक और पर्यावरणीय कारक है, इसमें शरीर के विभिन्न अंग प्रभावित होते हैं। और करीब 20 से 50 साल की उम्र के बीच के लोगों को अपना शिकार बनाने वाली इस बीमारी की चपेट में लंबे समय तक रहने से मरीज को विकलांगता का शिकार होना पड़ता है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) के कमजोर होने और माइलिन कोशिकाओं का बनना बंद होने के कारण होती है।अमेरिका के लोक स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 30 लाख लोग इस बीमारी की चपेट में हैं. साल 2015 में इस बीमारी से करीब 20,000 लोगों की मौत हुई थी।

कौन है डॉ. आशुतोष मंगलम

डॉ. आशुतोष मंगलम अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा के पैथोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं और वह मूल रुप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। और उनके इस शोध में बहुत ही अहम भूमिका उनके सहयोगी डॉ. शैलेश शाही ने निभायी है जो कि बिहार के रहने वाले हैं। इस शोध में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा और रोचेस्टर स्थित मेयो क्लीनिक के वैज्ञानिकों की भागीदारी रही है।

शोध

इस शोध में लगी टीम के अनुसार इस शोध के लिये ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ के मरीजों की आंतों में बैक्टीरिया की जांच की और उनकी तुलना सेहतमंद लोगों की आंत के बैक्टीरिया से की, और इस शोध की टीम के प्रमुख ने बताया कि‘‘हमने खोजा कि ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ के मरीजों की आंत के बैक्टीरिया सेहतमंद लोगों से भिन्न थे, हमारी टीम ने उन विशेष बैक्टीरिया की पहचान की जिनकी कमी ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस के मरीजों में थी, खासकर हमने पाया कि ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ के मरीजों में ‘प्रीवोटेला’ नाम के बैक्टीरिया की कमी थी‘प्रीवोटेला हिस्टीकोला’ ने बीमारी के लक्षण में सुधार लाने के साथ-साथ दिमाग और रीढ़ में सूजन को भी कम किया। और यह खोज इसी साल अगस्त महीने में ‘सेल रिपोर्ट’ पत्रिका में प्रकाशित हुई . हालांकि, मंगलम ने चेतावनी दी कि अभी इस बैक्टीरिया पर और शोध करने की जरूरत है ताकि इसके प्रभाव की जांच ठीक से की जा सके, इस टीम को यह खोज करने में करीब चार साल का वक्त लगा।

लेकिन इस शोध के जरिये उन लोगों के उपचार में भी काफी मदद मिलेगी जो इस बीमारी से पीडित हैं लेकिन सबसे खास बात यह है कि भारतीय मूल के वैज्ञानिक अपने शोध के जरिये लोगों की समस्याओं का निदान करने में प्रयत्न कर रहे हैं।

 

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